किशोरी का जीवन बदलने वालीं महिला अफसर एक साल के लिए बनेंगी ‘शौर्य दीदी’
जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस अनिल वर्मा की डिवीजन बेंच ने न केवल किशोरी की सुरक्षित घर-वापसी सुनिश्चित की, बल्कि मामले में अहम भूमिका निभाने वाली दो महिला उपनिरीक्षकों को एक वर्ष के लिए “शौर्य दीदी” नियुक्त करने के निर्देश देकर न्याय के साथ-साथ इंसानियत की मिसाल भी पेश की।
हैबियस कॉर्पस से सुरक्षित घर-वापसी तक
ग्वालियर निवासी पिता ने आरोप लगाया था कि मोटा उर्फ मुकेश उनकी नाबालिग बेटी को अवैध रूप से अपने कब्जे में रखे है। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने बालिका को खोजकर पेश किया। बालिका की सुरक्षित घर-वापसी के साथ याचिका का उद्देश्य पूर्ण होने पर मामले का निपटारा कर दिया गया।
काउंसलिंग से बदली किशोरी की ज़िंदगी
कोर्ट के निर्देश पर महिला उपनिरीक्षक क्षमा राजोरिया और सुमन धाकड़ ने वन स्टॉप सेंटर, ग्वालियर में किशोरी की काउंसलिंग की। संवाद, समझाइश और भरोसे के माहौल ने सकारात्मक बदलाव लाया। किशोरी ने स्वयं अदालत के समक्ष माता-पिता के साथ रहने की इच्छा जताई, जबकि माता-पिता ने प्रेम और सुरक्षा का आश्वासन दिया।
“मुझे सिलाई-कढ़ाई सीखनी है”
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने किशोरी की रुचियों को गंभीरता से सुना। औपचारिक शिक्षा में कम रुचि बताते हुए उसने सिलाई-कढ़ाई और बुनाई सीखने की इच्छा जताई। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि उसकी रुचि के अनुसार कौशल-प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वह आत्मनिर्भर बन सके।
पुलिस दीदी बनीं ‘शौर्य दीदी’
महिला पुलिस अधिकारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कोर्ट ने दोनों उपनिरीक्षकों क्षमा राजोरिया और सुमन धाकड़ को अगले एक वर्ष के लिए “शौर्य दीदी” नियुक्त किया। डिवीज़न बेंच ने ग्वालियर के SSP और Reserve Inspector, DRP Line (Police) को कहा है कि इस आदेश की एक कॉपी को दोनों सब इंस्पेक्टरों के सेवा-रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए।
